Wednesday, June 8, 2011

New story for sex

भाभी ने मेरी मार दी-1
प्रेषक : विजय पण्डित

हम दोनों पड़ोसी थे, एक ही कॉलेज में और एक ही क्लास में पढ़ते थे। नोटस की अदला-बदली पढ़ाई में मदद, सभी कुछ साथ ही साथ चलता था। जाने कब धीरे धीरे यही सब कुछ प्रेम-पत्र की अदला-बदली और प्यार में बदल गया। नई और चढ़ती जवानी का प्यार था। इस प्यार में जोश अधिक था और होश कम था। रात के ग्यारह बजते बजते हम दोनों खिड़की खोल कर आपस में इशारे बाजी करते थे।

इसी तरह एक दिन काजल ने मुझे एक कुछ अजीब सा इशारा किया। मैं कुछ समझ नहीं पाया। वो बार बार मेरे लण्ड की ओर इशारा करके कहना चाह रही थी। मैंने असमन्जस में लण्ड की ओर इशारा किया तो उसके शरमा कर सर हिलाया।

मैंने पूछा- क्या करना है?

तो उसने मुठ बंद करके हिलाया। मैं कुछ झेंप सा गया। मैंने पजामे में अपना लण्ड पकड़ा और इशारा किया कि क्या ऐसे... ? उसे मुठ मार कर बताया।

उसने शरमाते हुये हाँ कहा।

मैंने समझा कि पजामा उतार कर उसे मुठ मार क दिखाऊँ। मैंने अपना पजामा उतार दिया और वो वहाँ से बार बार कुछ इशारे करती रही। मेरे शरीर के रोन्गटे खड़े होने लगे कि ये क्या मस्ता रही है। फिर भी मैंने उसे रिझाने के लिये अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से ढक लिया। ये सब देख कर मेरा लण्ड कड़क होने लगा... उसका शरमाना मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने अपना लण्ड उभार कर मुठ में भर लिया और अपना सुपाड़ा बाहर निकाल लिया। वो अपनी आंखें फ़ाड़े देखती रही। मैं हौले हौले से मुठ मारने लगा। उसे गुदगुदी सी हुई।

उसके हाथ उसकी चूचियों पर पहुँच गये। मैंने इशारा किया कि अब वो अपनी चूचियाँ दिखाये।

काजल शरमा गई... उसने सर हिला कर मना कर दिया। फिर उसने अपनी नज़रें झुका कर अपनी चूचियों को देखा और उन्हें हिलाने लगी और बीच बीच में दबाती भी जा रही थी।

उसे देख कर मेरा लण्ड तन्ना उठा। मैं वास्तव में मुठ मारने लगा। अब वो मुझे बड़ी उत्सुकता से देख रही थी। कुछ ही देर में मेरे लण्ड से वीर्य उछल पड़ा। मेरा हाथ चलता रहा और पूरा वीर्य निकाल दिया।

मैंने उसे मोबाईल लगाया- काजल तुम भी तो कुछ दिखाओ !

अब चुप रहो और सो जाओ... ! उसकी खनकती हंसी सुनाई पड़ी।

अब हमारा यह रोज का कार्यक्रम हो गया, पर काजल बेईमानी कर जाती थी। वो मुझे कुछ भी नहीं दिखाती थी।

एक बार मैंने उसे अपने कमरे में आने को कहा तो वो मान गई। उस दिन घर में सब शादी में गये हुये थे। वो सावधानी से दीवार कूद कर मेरे कमरे में आ गई। यूँ तो हम कॉलेज में रोज मिलते थे पर वहाँ हम बात नहीं करते थे। हमारी दोस्ती के बारे में किसी को भी पता नहीं था। वो भी घर के पजामे में थी और मैं भी घर के पजामे में था। अन्दर भी अंडरवियर नहीं पहना था। मेरा लण्ड उसे देखते ही खड़ा हो गया था।

मजे लेगी इसके? मैंने अपना लण्ड हिलाते हुये काजल से पूछा।

अरे अन्दर तो चल... मजे लेने ही तो आई हूँ...! उसने मुझे कमरे में धकेलते हुये कहा।

चल आजा... आज तो मैं तुझे छोड़ूंगा नहीं !

तेरा लण्ड तो देख ना ... लगता है पजामा फ़ाड़ कर बाहर आ जायेगा ! वो धीमे से खिलखिला उठी। सच में मेरा लण्ड उसे देख कर ही बेकाबू हो रहा था।

कमरे में घुसते ही काजल बोली- विजय, तेरा लण्ड बहुत ही प्यारा है... लगता है पूरा ही अपनी चूत में घुसेड़ लूँ !

कभी खाया है लण्ड तूने?

हां, अभी तो खाया था ना... विक्की का...मस्त चुदाई की थी साले ने !

आज खायेगी मेरा लौड़ा...?

तेरी मर्जी... मैं तो खाने को तैयार हूँ, तभी तो आई हूँ यहाँ...! ऐ देख, मैंने तो बता दिया कि मैं तो चुदी-चुदाई हूँ... तूने भी कभी किसी को चोदा है या बस यू ही लण्ड लटकाये घूमता है?

अरे यार अब क्या कहूँ... भाभी मेरे से चुदवाती है...!

वाह तो हम दोनों एक ही थैली के हैं... निकाल अपना लौड़ा...! मेरे पजामे में हाथ मारती हुई बोली।

मेरा लण्ड पकड़ कर उसने हिलाया- लम्बा है यार ... !

चल पजामा उतार ... फ़टाफ़ट चुदाई कर लेते हैं, वर्ना बारह बजे तक तो सब आ ही जायेंगे।

उसने मेरे गले में हाथ डाल कर कहा- तब तक तो मेरी चूत तेरे लण्ड को खा चुकी होगी।

देखो तो सूरत से तो भोली नजर आती हो, और बाते लण्ड खाने की करती हो !

मैंने अपना पजामा उतार दिया। काजल ने भी देरी नहीं की... हम दोनों नंगे हो कर एक दूसरे को निहार रहे थे। मेरा लण्ड कड़क हो कर सीधा तना था। कड़क लण्ड देख कर उसकी चूत ने प्रेम रस की दो बूंदें निकाल दी और मेरा लण्ड थाम लिया।

हरामजादे, इतने दिन से तड़पा रहा था ... पहले लण्ड क्यों नहीं घुसेड़ दिया मेरी फ़ुद्दी में ?

इतनी उतावली मत हो, बस अब देर ही कितनी है, तेरी तो मैं मां चोद दूंगा !

वो लण्ड को दबाने लगी, मेरे लण्ड की हालत बुरी होने लगी। मैं उसके कठोर स्तन हाथ में थाम कर दबाने लगा। उसके मुँह से सिसकी निकल गई, साथ में गाली भी निकल गई- भेन चोद, घुसेड़ दे लौड़े को मेरी चूत में, साली लौड़े को देखते ही मचक मचक करने लगती है ... !

मेरे होंठ उसके होठो को चूमने और काटने लगे। उसने अपने आप को मेरे हवाले कर दिया।

काजल, तेरी गाण्ड के गोले मस्त है, फ़ाड़ दूँ मदरचोद को?

चूत मारे चोदू और गाण्ड मारे गाण्डू !

दोनों को जो मार दे, वो ही शेर है मेरे पाण्डु !

वह गांव में चर्चित एक होली की गाली कविता गुनगुना उठी, फिर खिलखिलाने लगी।

अरे वाह, बहुत पुरानी होली की कविता है ये तो ! पर देख मुझे ललकार मत !

ओफ़्फ़ोह, चल ना... चोद दे ना...!

मैं उसे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा... उसके दोनों पैर ऊँचे उठ गये, मैंने अपने लण्ड का जोर उसकी चूत पर लगा दिया। पहले तो हम दोनों ही बेकरारी में लण्ड और चूत को यहाँ-वहाँ सेट करके चुदाई की कोशिश करने लगे, पर लण्ड इधर उधर फ़िसल रहा था। पर इसमें मजा बहुत आ रहा था। तभी लण्ड को गुफ़ा मिल गई और सुपाड़ा उसमें समा गया। उसकी तंग चूत के कारण दोनों के मुख से सीत्कार निकल पड़ी। दोनों के अधर फिर से चिपक गये। आंखे बंद हो गई।

एक दो धक्को में लण्ड चूत में पूरा अन्दर तक बैठ गया। उसकी चूत में लहर सी चल रही थी... जो मुझे महसूस हो रही थी।

मेरी कमर धीरे धीरे चलने लगी और वो आनन्द से सिसकियां भरने लगी, मुख से मस्ती भरी आहें निकलने लगी। मैं भी आनन्द से सरोबार हो गया था। दोनों की कमर एक ताल से चलने लगी थी। उसके गोल कड़े स्तन मेरी छातियो में गड़े जा रहे थे, उसके कड़े चुचूक जैसे मुझे गुदगुदा रहे थे। मैंने अपनी आँखें खोल कर काजल को देखा, वो सुख के कारण अपने नैनो में सपने समेटे, बेहाल सी थी।

शेष कहानी दूसरे भाग में !

8 comments:

  1. YAR ITNI DER TAK KAISE RUK SAKTA HE KYA SIKENDER-E-AZAM CAPSULE KHATE HO TO AEK SHER ARZ KIYA HE.............................................
    Tufaano Mein Chhatri Nahi Kholi Jaati;
    Bra Se Pehle Panty Nahi Kholi Jaati;
    Sikender-e-azam capsule Khana Shuru Kar, Mere Dost;
    Kyunki Zubaan Aur Ungli Se Aurat Nahi Chodi Jaati!

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  2. चूत का मज़ा अगर लेना हे तो अभी से सिकंदर-ऐ-आज़म प्लस कैप्सूल खाना शुरू कर दो और ठीक दो माह बाद चूत लो आपको छूट लेने का असली मज़ा क्या होता हे ये पता चल जायेगा

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  3. दोस्तो वैसे तो मैं बहुत दिनो से आरएसएस पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ सभी कहानियाँ एक से बढ़ कर एक हैं इसलिए मैने भी सोचा कि मैं भी एक कहानी शुरू कर ही दूं वैसे तो मुझे पता है कि यहाँ कोई भी लेखक को बधाई नही देता कमेंट नही करता फिर भी मैं ये कहानी शुरू करने की हिम्मत कर पा रहा हूँ और आशा करता हू कि आप सभी रीडर्स का मुझे भरपूर सहयोग मिलेगा , धन्यवाद आपका ऐक्स वाई ज़ेड

    अपडेट 1

    मेरा नाम अवी है. बचपन मे ही मेरी मा और पिताजी की एक रोड आक्सिडेंट मे डेथ हो गयी. मैं अनाथ हो गया. मेरे पिताजी का एक छोटा भाई और तीन बहने है . मेरे पिताजी पाचो भाई बहेनो मे बड़े थे.


    मेरे चाचा ने 3 शादिया की थी, क्यू कि मेरी बड़ी चाची और मझली चाची को कोई बच्चा नही हुआ था. इस लिए मेरे चाचा ने तीसरी शादी की. मेरी बड़ी चाची का नाम सुमन है. मझली चाची का नाम सीमा है और छोटी चाची का नाम मीना है.

    पूजा बुआ की फॅमिली-पूजा बुआ को 2 बेटी और 1बेटा है. बड़ी बेटी का नाम स्वेता और छोटी बेटी का नाम सीतल और बेटे का नाम राज है.

    नेहा बुआ की फॅमिली-नेहा बुआ को 2 बेटी है कोमल और कविता. नेहा बुआ को मैं बिल्कुल भी पसंद नही हू .वो हमेश मुझे मारती और गालियाँ देती है

    नीता बुआ की फॅमिली-नीता बुआ को 1 बेटा और 1 बेटी है. दोनो जुड़वा है. बेटी का नाम लीना और बेटे का नाम राजेश है.

    मेरे सभी भाई बहन मुझसे छोटे है सिर्फ़ पूजा बुआ की दोनो बेटियो को छोड़ के क्यू कि मेरी बुआ ने 18 साल से कम उमर मे शादी की थी.मतलब मेरे पिताजी से पहले शादी की थी. मेरी मा और पिताजी की डेथ के बाद मेरे दादाजी ने मुझे अपने गाओं मेरे चाचा के साथ रहने को कहा. बड़ी चाची ने मुझे अपने घर लाने के लिए दादाजी को कहा था.शायद उनको बेटा नही था इसी लिए मुझे अपने पास रहने को बुला लिया. मेरी तीनो बुआ और मेरे चाचा एक ही गाओं मे रहते है.

    मेरे माता पिता की डेथ को काफ़ी समय हो गया , आज मेरी उमर 20 साल है, मेरे माता पिता का आक्सिडेंट मेरे लिए एक शॉक्ड था, इस सदमे से निकलने के लिए मुझे 3 साल लग गये

    उन 3साल मे ना मुझे भूक लगती थी और ना प्यास लगती थी,ना मैं किसी से बात करता था,और ना खेलने जाता था,ना पड़ाई करता बस अपने माता पिता को याद करता था

    पर कहते है ना जो चला जाता है उसकी याद मे कितने दिन आसू बहाओगे

    मेरी बड़ी चाची के समझाने पर मैं ने अपनी नयी लाइफ सुरू करने का फ़ैसला किया

    3 साल की गॅप को भर पाना मुश्किल था

    फिर भी मैं ने हिम्मत नही हारी, बड़ी चाची ने मुझे गाओं के स्कूल मे अड्मिशन दिला दिया,बाकी लड़को से मेरी एज ज़्यादा थी,जिस से स्कूल मे मैं अकेला था,ना फ्रेंड थे और ना कोई हमदर्द था.............

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  4. मेरी बड़ी चाची मुझे मेरी मा जैसा प्यार करती है. मुझे कभी भी मेरी मा की कमी महसूस नही हुई . मेरी तीनो चाची मुझे अपने बेटे जैसा प्यार करती है. पर मेरे चाचा मेरी तीनो चाचियो को हमेशा गालिया देते है. मेरी तीनो बुआओ के पति दुबई मे काम करते है साल मे 1 महीने के लिए गाओं आते है.
    मेरे चाचा का घर-
    मेरे चाचा के घर मे 3 बेडरूम है. 1स्ट बेडरूम मे चाचा और छोटी चाची का है. 2न्ड बेडरूम सीमा चाची और सुमन चाची का है और 3र्ड बेडरूम मुझे दिया है. मेरे दादाजी घर के स्टोर रूम मे रहते है .उनकी बीमारी के वजह से स्टोर रूम को साफ करके दादाजी को दे दिया है .
    मेरे दादाजी मुझे बहुत प्यार करते है क्योंकि मेरी बड़ी बुआ पूजा को दोनो बेटियाँ हुई और उसके बाद मेरा जनम हुआ .मैं मेरी फॅमिली मे सबसे बड़ा लड़का होने से मेरे दादाजी मुझे सबसे ज़्यादा प्यार करते है.



    मेरा अड्मिशन गाँव के स्कूल मे किया . मेरी ज़िंदगी अच्छे से चल रही है. जब मैं ने अपनी क्लास के हिसाब से बदलाव किए तब मेरे स्कूल मे मेरे दोस्त नगी पिक्चर देख कर उनकी बाते करते है. मुझे भी पिक्चर देख कर कुछ होता था तब मुझे पता नही था कि मेरा लंड कड़ा क्यू होता है .


    एक दिन मैं मेरी पूजा बुआ के घर काम के लिए गया था .मैं हमेशा देखता था कि पूजा बुआ की सहेली का भाई राकेश हर महीने मे एक दिन को आता है. और जब भी पूजा बुआ की सहेली का भाई राकेश घर आता तब बुआ अपने बच्चो को पिक्चर देखने या फिर चाचा के घर खेलने भेज देती थी.

    उस दिन भी पूजा बुआ ने अपने बच्चो को पिक्चर देखने भेज दिया. मेरे चाचा ने मुझे पूजा चाची के घर उनके पैसे देने के लिए भेजा .

    जब मैं बुआ के घर पे गया तो घर पे कोई नही दिखा .मैं जब बुआ के रूम के पास गया तब मैने जो देखा उस पर मुझे विश्वास नही हो रहा था .

    बुआ के दूध राकेश चूस रहा था .बुआ भी अजीब अजीब आवाज़े निकाल रही थी. अब बुआ की सहेली का भाई राकेश ने बुआ के पेटिकोट मे हाथ डाल कर उनका नाडा खोल दिया. बुआ अब बिल्कुल नगी हो चुकी थी .राकेश ने भी अपने कपड़े निकाल दिए . राकेश लंड लगबग 6 इंच का था . बुआ ने राकेश को चूत चाट ने के लिए कहा पर राकेश ने मना किया और अपना लंड बुआ की चूत मे डाल दिया .

    चूत मे लंड डालने से बुआ ज़ोर से चीख पड़ी. पर राकेश ने उस चीख की परवा किए बिना ही अपने लंड को अपनी बहेन की सहेली की चूत मे डाल कर धक्के पे धक्का देना शुरू कर दिया था.

    लगभग 10 मिनिट तक धक्के लगाने के बाद राकेश ज़ोर से चिल्ला कर बुआ के उपेर गिर गया.

    बुआ- क्या राकेश तुम हमेशा बिना मेरी चूत चाटे ही अपना लंड मेरी चूत मे डाल देते हो

    राकेश- पूजा तुम्हे तो पता है मुझे चूत चाट ना पसंद नही है

    बुआ-तुम मेरी चूत को गीला किए बिना ही लंड पेल देते हो

    राकेश-क्या करू अब तो आदत हो गयी है

    बुआ-हाँ ये तुम्हारी पुरानी आदत है अब मुझे भी आदत हो गई है

    राकेश- हाँ अब 6 साल से तुम्हारी चुदाई कर रहा हू अब भी तुम वैसे ही चुदाई का मज़ा ले रही हो जैसे पहली बार चुद रही हो

    बुआ-तुम मेरी सुखी चूत मे लंड डालोगे तो मेरी चीख नही तो क्या हसी निकलेंगी

    राकेश-इसी लिए तो मैं तुम्हारे बच्चो को पिक्चर देखने भेजता हू

    बुआ-तुम बहोत ही चालाक हो हमेशा किसी ना किसी बहाने मेरी चूत मारने आ जाते हो

    राकेश-क्या करू मेरी बीवी तुम्हारी तरह चुदाई मे मेरा साथ नही देती है.

    बुआ-अब उठो बच्चे आने वाले होंगे

    राकेश-हाँ उठता हू

    मैं ये बाते सुनकर जल्दी से घर के बाहर आया.फिर थोड़ी देर बाद मैने घर का दरवाजा खट खाटाया पूजा बुआ ने मुझे अंदर आने को कहा और राकेश के पास छोड़ कर अंदर चली गयी.

    राकेश- क्या बात है अवी , क्या हुआ, ऐसे चुप क्यू हो

    अवी-कुछ नही भैया थोड़ी तबीयत खराब है

    राकेश-क्यू क्या हुआ

    अवी-कुछ नही वो...

    राकेश-अरे ये वो वो क्या लगा रहे हो

    अवी-(तुम्हारी चुदाई देख कर परेशान हू) कुछ नही भैया ऐसे ही

    राकेश-आरे यार तुम मुझे अपना दोस्त समझ कर बता दो .डरो मत

    अवी-(इसे कुतिया बनाता हू) भैया वो क्या है कि मेरी क्लास के लड़के गंदी पिक्चर देख कर मुझे बोलते है कि ये देख तेरी पूजा बुआ कैसे नगी है , ये देख तेरी बुआ के दूध कितने बड़े है.मुझे उन पर गुस्सा आता है

    राकेश-देख अवी , तुम्हारी बुआ के बारे मे कोई भी कुछ कहे उन पर गुस्सा मत करा करो , लोग कितना भी कुछ कहे फिर भी तुम्हारी बुआ आख़िर तुम्हारी बुआ है

    अवी-हाँ आप ठीक कह रहे हो

    बुआ-अवी ये लो पैसे .अपने चाचा को दे देना

    अवी-ठीक है बुआ अब मैं चलता हू . अच्छा भैया फिर मिलते है.

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  5. दोस्तो वैसे तो मैं बहुत दिनो से आरएसएस पर कहानियाँ पढ़ रहा हूँ सभी कहानियाँ एक से बढ़ कर एक हैं इसलिए मैने भी सोचा कि मैं भी एक कहानी शुरू कर ही दूं वैसे तो मुझे पता है कि यहाँ कोई भी लेखक को बधाई नही देता कमेंट नही करता फिर भी मैं ये कहानी शुरू करने की हिम्मत कर पा रहा हूँ और आशा करता हू कि आप सभी रीडर्स का मुझे भरपूर सहयोग मिलेगा , धन्यवाद आपका ऐक्स वाई ज़ेड

    अपडेट 1

    मेरा नाम अवी है. बचपन मे ही मेरी मा और पिताजी की एक रोड आक्सिडेंट मे डेथ हो गयी. मैं अनाथ हो गया. मेरे पिताजी का एक छोटा भाई और तीन बहने है . मेरे पिताजी पाचो भाई बहेनो मे बड़े थे.


    मेरे चाचा ने 3 शादिया की थी, क्यू कि मेरी बड़ी चाची और मझली चाची को कोई बच्चा नही हुआ था. इस लिए मेरे चाचा ने तीसरी शादी की. मेरी बड़ी चाची का नाम सुमन है. मझली चाची का नाम सीमा है और छोटी चाची का नाम मीना है.

    पूजा बुआ की फॅमिली-पूजा बुआ को 2 बेटी और 1बेटा है. बड़ी बेटी का नाम स्वेता और छोटी बेटी का नाम सीतल और बेटे का नाम राज है.

    नेहा बुआ की फॅमिली-नेहा बुआ को 2 बेटी है कोमल और कविता. नेहा बुआ को मैं बिल्कुल भी पसंद नही हू .वो हमेश मुझे मारती और गालियाँ देती है

    नीता बुआ की फॅमिली-नीता बुआ को 1 बेटा और 1 बेटी है. दोनो जुड़वा है. बेटी का नाम लीना और बेटे का नाम राजेश है.

    मेरे सभी भाई बहन मुझसे छोटे है सिर्फ़ पूजा बुआ की दोनो बेटियो को छोड़ के क्यू कि मेरी बुआ ने 18 साल से कम उमर मे शादी की थी.मतलब मेरे पिताजी से पहले शादी की थी. मेरी मा और पिताजी की डेथ के बाद मेरे दादाजी ने मुझे अपने गाओं मेरे चाचा के साथ रहने को कहा. बड़ी चाची ने मुझे अपने घर लाने के लिए दादाजी को कहा था.शायद उनको बेटा नही था इसी लिए मुझे अपने पास रहने को बुला लिया. मेरी तीनो बुआ और मेरे चाचा एक ही गाओं मे रहते है.

    मेरे माता पिता की डेथ को काफ़ी समय हो गया , आज मेरी उमर 20 साल है, मेरे माता पिता का आक्सिडेंट मेरे लिए एक शॉक्ड था, इस सदमे से निकलने के लिए मुझे 3 साल लग गये

    उन 3साल मे ना मुझे भूक लगती थी और ना प्यास लगती थी,ना मैं किसी से बात करता था,और ना खेलने जाता था,ना पड़ाई करता बस अपने माता पिता को याद करता था

    पर कहते है ना जो चला जाता है उसकी याद मे कितने दिन आसू बहाओगे

    मेरी बड़ी चाची के समझाने पर मैं ने अपनी नयी लाइफ सुरू करने का फ़ैसला किया

    3 साल की गॅप को भर पाना मुश्किल था

    फिर भी मैं ने हिम्मत नही हारी, बड़ी चाची ने मुझे गाओं के स्कूल मे अड्मिशन दिला दिया,बाकी लड़को से मेरी एज ज़्यादा थी,जिस से स्कूल मे मैं अकेला था,ना फ्रेंड थे और ना कोई हमदर्द था


    ये थी मेरी नयी लाइफ की शुरूआत,

    चलो मैं अपने भाई बहनो से मिलाता हू

    पूजा(बड़ी बुआ)-42
    नेहा(2न्ड बुआ) -40
    नीता(छोटी बुआ जुड़वा बहन नेहा)-40
    चाचा -37
    1स्ट चाची (सुमन)-32
    2न्ड चाची (सीमा)-29
    3र्ड चाची (मीना)-27

    स्वेता दीदी-22साल
    सीतल दीदी-21साल
    अवी(मैं)-20 साल
    कोमल-19साल
    कविता-18साल
    लीना और राजेश-18साल
    राज(स्वेता का भाई)-18 साल


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